गुरुवार, 2 सितंबर 2010
खेलों से पहले होगा खत्म शीला का खेल
राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में शिथिलता और भ्रष्टïाचार के मामले में आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी को मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के मुकाबले कांगे्रस आलाकमान की तरफ से खुले तौर पर खासी फटकार पड़ी है, लेकिन कांगे्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांगे्रस महासचिव राहुल गांधी की नजरों में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की अब वो वकत नहीं रह गई जिसके दम पर वो अब तक अपनी राजनीतिक लड़ाईयां जीतकर दिल्ली पर अपना एकछत्र राज कायम रखने में कामयाब रहीं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चाएं हैं कि राष्ट्रमंडल खेलों के बाद मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी को दरकिनार कर दिया जाएगा। लेकिन कांगे्रस के बहुत ही विश्वस्त और करीबी सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और सुरेश कलमाड़ी को उनके पदों से पहले भी हटाए जाने का कांगे्रस आलाकमान निर्णय ले सकता है। अभी प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांगे्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी भले ही सार्वजनिक तौर पर यह कहते रहे हैं कि कॉम्नवेल्थ गेम देश के गौरव का सवाल हैं और इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि इन लोगों ने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और सुरेश कलमाड़ी के भ्रष्टाचार और नकारेपन को भुला दिया है। वैसे कांगे्रस के युवराज राहुल गांधी अपने उस वक्तव्य से भी उलझे-उलझे से हैं जिसमें उन्होंने कर्नाटक की सरकार को भ्रष्टतम सरकार की संज्ञा से नवाजा था। अब युवराज से इस बात का भी जवाब जनता चाहती है कि खुलेआम भ्रष्टचार में लिप्त दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बारे में उनका क्या ख्याल है? मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के लिए यह बात भी कम शर्मनाक नहीं है कि दिल्ली की सत्ता पर उनके आसीन रहते हुए प्रधानमंत्री को कॉम्नवेल्थ गेम की तैयारियों की निगरानी के लिए खुद मैदान में उतरना पड़ा। कांगे्रसी हल्कों में इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि जब शीला दीक्षित का कॉम्नवेल्थ गेम की तैयारियों में नकारापन साबित हो चुका है, तो उनको कॉम्नवेल्थ गेम जैसे अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के समय किस आधार पर दिल्ली की मुखिया के तौर पर कांगे्रस द्वारा पेश किया जाए। इन्हीं सब बातों के मद्देनजर कांगे्रस के बड़े नेताओं के बीच में चिंतन-मनन जारी है और इस बात का ब्योरा तैयार किया जा रहा है कि राष्ट्रमंडल खेलों से पहले शीला को पद से हटाने के फैसले से कांगे्रस को क्या नफा नुकसान होगा। वैसे शीला के विरोधियों का कहना है कि निकट भविष्य में तो दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने नहीं हैं ऐसे में शीला दीक्षित को हटाए जाने से कांगे्रस पार्टी की छवि निखरेगी ही नुकसान होने की संभावनाएं कतई नहीं। हालांकि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने राजनीतिक गलियारों में उनके खिलाफ चल रही हवा का जायजा लेने के लिए बुधवार को अपने घर रोजा अफ्तार के बहाने मुस्लिम समुदाय के लोगों का जमावड़ा लगाकर आप करार रखने का स्वांग रच डाला, हालांकि चाटुकार, चापलूस कांगे्रसी और शीला परिक्रमा करने वाले पत्रकार उनकी कुर्सी टस से मस न होने का उन्हें आश्वासन देने से नहीं चूक रहे हैं।
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