कांगे्रस महासचिव राहुल गांधी ने जिस तरह से जमीनी स्तर पर उत्तर प्रदेश की कांगे्रस में जान फूंकी और पिछले लोकसभा चुनाव में बीस सालों के कांगे्रस के प्रदर्शन के मुकाबले 22 सीटों पर बेहतरीन जीत पार्टी को दिलाने में कामयाबी हासिल की और उसके बाद बिहार विधानसभा के अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए राहुल गांधी ने जिस तरह से बिहार में करीब साल भर पहले युवाओं की एक बड़ी टीम को ब्लाक स्तर पर सक्रिय कर पंचायत चुनाव में जिस तरह से पार्टी को भारी जीत दिलाई उसको देखते हुए यह कहा जा सकता है कि कांगे्रस महासचिव और युवा कांगे्रस के प्रभारी राहुल गांधी बिहार में कांगे्रस को खासा मजबूत बनाने और बेहतर चुनावी नतीजे देने में पूरी तरह से सक्षम हैं।
कांगे्रस महासचिव राहुल गांधी पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भी अपनी भूमिका को बेहतर ढंग से निभाने के लिए कमर कसे हुए हैं और इस राज्य में भी उन्होंने शुरूआती सभाओं में अपने तेवरों और सबको साथ लेकर चलने वाली सूझबूझ की राजनीति का बेहतर परिचय दिया है। कांगे्रसी हल्कों में इस बात की चर्चाएं जोरों पर हैं कि बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों का रुख देखने के बाद कांगे्रस के युवराज राहुल गांधी को केन्द्र में महत्वपूर्ण और बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने के लिए उनके ऊपर खासा दबाव बनाया जा सकता है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा प्रदेशों के अध्यक्षों का चुनाव भी होना है। इन राज्यों की समितियों ने सर्वसम्मति से प्रदेशाध्यक्षों का चुनाव करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से कांगे्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी के ऊपर छोड़ दी है। कांगे्रस की इस नीति के पीछे भी युवराज राहुल गांधी की सक्रियता को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इन प्रदेशों के अध्यक्षों के चुनाव में भले ही सीधे तौर पर राहुल गांधी का कोई दखल न हो और अध्यक्षों के नामों की घोषणा कांगे्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी ही करे, मगर राहुल गांधी का जिस भी नेता को सहयोग प्राप्त होगा उसका प्रदेशध्यक्ष बनना निश्चित है।
कांगे्रस महासचिव राहुल गांधी की भावी रणनीति को और प्रभावी बनाने के लिए कांगे्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी के करीबी और उनके सिपाहसलार रात-दिन एक कर राहुल गांधी के लिए राष्टरीय स्तर पर महौल बनाने की कई योजनाएं और नीतियां बनाने में जुटे हैं। राहुल गांधी भी कांगे्रस पार्टी में समाज के सभी वर्गों को जोडऩे के लिए जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं पर विश्वास करते हुए कांगे्रस को बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में मजबूत बनाने के लिए अपने दौरे और कार्यक्रम में वास्तविक कार्यकर्ताओं को तरजीह देने का काम रहे हैं। राहुल गांधी की स्वीकार्यरता और लोकप्रियता से विरोधी पार्टियों की हालत पस्त है और आम जनता राहुल गांधी के रूप में युवा नेता पाकर मस्त है।
kya sir ji aap ko sirf Rahul hi dikh rahe hai aare congress ki lagi padi hai uska kya use bhi to dekhiye ...
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